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अंत ही आरंभ है

"प्लीज ,यशिका put down your gun please"

सामने जमीन पर पडे एक शख्स जिसके कपड़े शाही थे। दिखने वो रइस लग रहा था। लेकिन आज उसकी हालत बत से बतर थी। मुंह से खून निकल रहा था। चार गोली लगी हुई। दो पैरों में एक कंधे और चोथी उसके पेट में फिर भी वो पूरी ताकत लगाकर जिंदा था। और यह था

देवांश कपूर जिसकी उम्र लगभग 28 साल है।

की थी जो इस देश का बिलिनियर है और साथ ही साथ एक इटालियन माफिया भी है दिखने में किसी god Greek से कम नहीं था। लेकिन पता नहीं क्यू इतना बडा माफिया होने बावजूद आज वो अपने प्यार रक्षा नहीं कर पा रहा था।पैसा ताकत रुतबा आज सब कुछ फिका पड चुका था। उसकी ताकत मिटी मे मिल चुकी थी।

उसने जिंदगी कभी सोचा नहीं था। जिस लड़की पर वो  इतना भरोसा करता था और वो इस तरीके उसका विश्वासघात करेगी।

यशिका जो देवांश के होने वाली दुल्हन पर गन तानकर खडी हुई थी। उसके आंखों में आंसू तैर गए। क्योंकि सामने खडी लड़की और कोई नहीं उसकी सौतेली बहन थी। जिसे यशिका आज मौत के घाट उतारने वाली थी।

यशिका को सामने खडी बानी डर से कांप रही थी। आज उसकी मौत तय थी। जिसे भगवान भी बदल नहीं सकता था।

"प्लीज यशिका मुझे माफ कर दो "

सामने खडी यशिका के कांप हल्के कांपने लगे।उसकी कानों में थोडी देर हुई बाते गुंजने लगी।

"हमने आपको पाल पोस कर बडा किया है ताकि आप हमारे काम आ सके।आप बस एक मोहरा हो।जो में चलाऊंगा और आपको वही करना होगा जो हम चाहते हैं। हमने बचपन में आपके जिंदगी का सौदा किया है।आपकी जिंदगी का फैसला लेने का हक सिर्फ हमे है।आपने हमारी बात नहीं मानी तो जिसे आप इतने सालों से ढूंढ रही है।वो कभी आपको मिलेगा नहीं,याद रखिए हम कौन हैं और हमारी पहचान क्या है हमारे कैद में रहने वाला इंसान,हमारे इज्जत के बिना सांस भी नहीं लेता।"

देवांश जिसके दोनों पैरो में गोली लगी थी।वो पुरी ताकत लगाकर पैरो रगड़ते हुए आगे बढ रहा था आज वो खुद को काफी बेबस महसूस कर रहा था।उसका होने वाला प्यार आज उसके सामने मौत के करीब खडा था। और वो कुछ नहीं कर सकता था।

"यशिका, i am bagging you प्लीज उसे जाने दो तुम जो मांओगी में तुम्हें वो दूंगा प्लीज उसे छोड दो" देवांश की सांसें कमजोर पड़ने लगीं।

उस पहाड़ी इलाकों में सिर्फ तीन शख्स मौजूद थे। क्योंकि सिंघानिया के काफी सारे गार्ड्स को यशिका ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था।

"बानी क्या तुम सच में इंसान कहने के लायक हो।" यशिका ठडी आवाज में कहा।

जिसे सुनकर बानी के माथे पर पसीना छलक आ रहा।

"यशिका मै अपनी ग़लती को एस्पेक्ट कलती हूं" बानी अपनी सफाई दे रही थी कि यशिका माथे के बीचोंबीच गन को तानते हुए कहा।

तुम चाहती हो के मरने के बाद देवांश तुमसे नफरत करे।"यशिका आवाज में जहर जैसा तिखापन था।जो सिधा बानी सिने में उतर गया।

बानी आंसू भरी आंखों में एक नज़र देवांश को देखा जिसके आंखों में अपने लिए बेशुमार प्यार था। और वो कभी इस प्यार को नफ़रत बदलते हुए नहीं देख सकती थी।

"अपनी आखिरी इच्छा बोला बानी" यशिका के शब्दों ने बानी सिना छन्नी कर दिया।

"मैं मरना नहीं चाहती,यशिका मुझे छोडो दो " बानी रोते हुए कहा।

यशिका आंखें में अजीब सा दर्द उतर आया।

"जब खुद की बारी आती है तब समझ आता है कि दर्द क्या होता है। खौफ क्या होता है कितनी तकलीफ होती है जब हमारी मौत हमारे सामने खड़ी होती है। कहते यशिका आंखें में नमी तैर गई। जिसे बानी के देखने पहले उसने अपनी आंखें में छुपा दिया।

"मैं इस खेल को आज हमेशा के लिए खत्म करने जा रही हूं।" यशिका ने कहा गन का ट्रिगर्ड लोड हुआ। बानी समझ चुकी थी अब कोई रास्ता नहीं है।

बानी गहरी सांस छोड़ी।

"ठीक है "बानी ने कहा,"मेरी सजा माफी के लायक नहीं थी वह बडा गुना था लेकिन याद रखना हर पहलू के दो सिक्के होते हैं एक तुमने देख लिया दूसरा तुम कभी नहीं देख पाओगी। और हा आज मैं मारूंगी तो अपनी गुना की वजह से मारूंगी लेकिन याद रखना तुम्हारी जिंदगी आज के बाद बदल जाएगी तुम बिना किसी गुनाह के बर्बाद होने वाली हो और तुम्हारी यह बर्बादी कोई और नहीं देवांश खुद तय करेगा। मैं तो आज मर जाऊंगी सुकून से लेकिन मेरी गुनाहों की सजा तुम्हें मिलेगी।"

यशिका ने बस एक नज़र देवांश को देखा

"यशिका प्लीज उसे छोड़ दो वरना तुम बहुत पछताओगी "देवांश दर्द से चिल्ला पड़ा।

यशिका उसे नज़रें फेर कर सामने बानी को देखा जिसके चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट थी। जिसे देखकर यशिका के जबड़े कस गए। उसने जोर से ट्रिगर दबाया दो गोलियों के साथ ही बानी का भेजा उड गया। पलक झपकते ही बानी की लाश नीचे गिर पड़ी।

यह मजर इतना खौफन था।कि देवांश जोर से चिल्ला पडा

"बानी!!!"

यशिका ने एक नजर बानी मृत शरीर को देखा। उसकी आंखों में कोई भाव नहीं था।

देवांश जैसे तैसे बानी के करीब आया। और उसे बाहों में भर लिया। बानी चेहरे भी बचा नहीं था।

"नईईईईईई बानी तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकतीं "

कहते हुए वो ज़ोर से दहाड़ पडा।उसकी आवाज इतनी तेज थी कि पूरे पहाड़ों में गुंज उठीं।उसकी आवाज ने यशिका का दिल ठिठक गया।

यशिका का देवांश को देख रही थी। लाचार _बेबस _टूटा हुआ। जैसे उसकी पूरी दुनिया खत्म हो गई हो।

लेकिन यह दर्द देवांश सह सकता था। पर वो नहीं जब उसे बानी सच्चाई पता चलेगी तो शायद वो खुद ही अपने आप को खत्म कर देगा।

यशिका ने एक नजर बानी के मृतक शरीर को देखकर उपर आसान को देखा और आंखे बंद कर दी।

मेरी दिल से दुआ है कि बानी तुम्हारे आत्मा को शांति मिले। और भगवान तुम्हें माफ करके फिर से तुम्हें इस मनुष्य जीवन में भेजें ताकि तुम्हारे बूरे कर्म को सही करने एक वापस तुम्हें मौका मिले।

वही देवांश कपूर दहाड़ते हुए रो पड़ा और अचानक से उसके नजर पास पडी गन पर गई। उसने वो गन उठाईं।यह देखकर यशिका आगे बढ कर उसे रोक पाती की देवांश पूरी ताकत के साथ अपने सिने पर गन चलाईं।

यह मंजर इतना खौफन था।कि देवांश जोर से चिल्ला पडा

"बानी!!!"

यशिका ने एक नजर बानी मृत शरीर को देखा। उसकी आंखों में कोई भाव नहीं था।

देवांश जैसे तैसे बानी के करीब आया। और उसे बाहों में भर लिया। बानी चेहरे भी बचा नहीं था।

"नईईईईईई बानी तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकतीं "

कहते हुए वो ज़ोर से दहाड़ पडा।उसकी आवाज इतनी तेज थी कि पूरे पहाड़ों में गुंज उठीं।उसकी आवाज ने यशिका का दिल ठिठक गया।

यशिका का देवांश को देख रही थी। लाचार _बेबस _टूटा हुआ। जैसे उसकी पूरी दुनिया खत्म हो गई हो।

लेकिन यह दर्द देवांश सह सकता था। पर वो नहीं जब उसे बानी सच्चाई पता चलेगी तो शायद वो खुद ही अपने आप को खत्म कर देगा।

यशिका ने एक नजर बानी के मृतक शरीर को देखकर उपर आसान को देखा और आंखे बंद कर दी।

मेरी दिल से दुआ है कि बानी तुम्हारे आत्मा को शांति मिले। और भगवान तुम्हें माफ करके फिर से तुम्हें इस मनुष्य जीवन में भेजें ताकि तुम्हारे बूरे कर्म को सही करने एक वापस तुम्हें मौका मिले।

वही देवांश कपूर दहाड़ते हुए रो पड़ा और अचानक से उसके नजर पास पडी ग

न पर गई। उसने वो गन उठाईं।यह देखकर यशिका आगे बढ कर उसे रोक पाती की देवांश पूरी ताकत के साथ अपने सिने पर गन चलाईं।

खून का फव्वारा बाहर निकला और देवांश निढाल हो बानी मृतक शरीर पर गिड़ा।

यशिका जोर से चिल्ला पड़ी।

"देवांश!!!!"

जारी है

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